अरुण बजाज, उद्योगपतिअरुण बजाज, शहर के उन चुनिंदा उद्योगपतियों में शामिल हैं, जिनकी सोशल नेटवर्किंग जबर्दस्त है। श्री बजाज अग्रवाल समाज, मानवसेवा समिति सरीखी शहर की लगभग एक दर्जन सामाजिक, औद्योगिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ जुड़े हैं। मूलत: राजस्थान के जिला झुंझनू के गांव बिसाऊ के रहने वाले श्री बजाज 1980 से फरीदाबाद में हैं। बेडमिंटन, क्रिकेट और टेबल टेनिस के अच्छे प्लेयर रहे हैं। स्टेट लेवल तक उन्होंने कॉम्पिटीशन जीते हैं। निर्धन छात्रों के लिए उनकी ओर से स्कूल भी चल रहा है। छुटपन में समाजसेवा का शौक था जो 1985 में एक्सिडेंट के बाद जुनून में बदल गया है। वह आज में जीने में विश्वास करते हैं। सालासर के हनुमानजी उनके इष्ट हैं और वे अपनी तरक्की का श्रेय अपने सभी भाइयों को देते हैं। प्रेमचंद और वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास उनके पसंदीदा रहे हैं। तरक्की के लिए वह मौके, अनुशासन और समय की पाबंदी को बेहद जरूरी मानते हैं। 48-48 घंटे लगातार काम करने वाले श्री बजाज कहते हैं कि जितना ईश्वर ने दिया है वही मेंटेन हो जाए बहुत है और बहुत ज्यादा की कामना वे नहीं करते। क्योंकि तरक्की की कोई सीमा तो तय नहीं है। आज भी पिता के उस वाक्य को याद करते हैं जिसमें उन्होंने कहा था जो भी करो अपना करो। अपना काम करने से बढिय़ा कुछ नहीं है चाहे काम कैसा भी हो।
