मंगलवार, 22 सितंबर 2009

04 सोशल लीडर

अरुण बजाज, उद्योगपति
अरुण बजाज, शहर के उन चुनिंदा उद्योगपतियों में शामिल हैं, जिनकी सोशल नेटवर्किंग जबर्दस्त है। श्री बजाज अग्रवाल समाज, मानवसेवा समिति सरीखी शहर की लगभग एक दर्जन सामाजिक, औद्योगिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ जुड़े हैं। मूलत: राजस्थान के जिला झुंझनू के गांव बिसाऊ के रहने वाले श्री बजाज 1980 से फरीदाबाद में हैं। बेडमिंटन, क्रिकेट और टेबल टेनिस के अच्छे प्लेयर रहे हैं। स्टेट लेवल तक उन्होंने कॉम्पिटीशन जीते हैं। निर्धन छात्रों के लिए उनकी ओर से स्कूल भी चल रहा है। छुटपन में समाजसेवा का शौक था जो 1985 में एक्सिडेंट के बाद जुनून में बदल गया है। वह आज में जीने में विश्वास करते हैं। सालासर के हनुमानजी उनके इष्ट हैं और वे अपनी तरक्की का श्रेय अपने सभी भाइयों को देते हैं। प्रेमचंद और वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास उनके पसंदीदा रहे हैं। तरक्की के लिए वह मौके, अनुशासन और समय की पाबंदी को बेहद जरूरी मानते हैं। 48-48 घंटे लगातार काम करने वाले श्री बजाज कहते हैं कि जितना ईश्वर ने दिया है वही मेंटेन हो जाए बहुत है और बहुत ज्यादा की कामना वे नहीं करते। क्योंकि तरक्की की कोई सीमा तो तय नहीं है। आज भी पिता के उस वाक्य को याद करते हैं जिसमें उन्होंने कहा था जो भी करो अपना करो। अपना काम करने से बढिय़ा कुछ नहीं है चाहे काम कैसा भी हो।

03 ऊँचे सपने, ऊँची उड़ान

डॉ अनिल जिंदल, सीएमडी, एसआरएस ग्रुप
पिछले चंद सालों में एसआरएस ग्रुप को 2500 करोड़ रुपये का ग्रुप बनाकर दिखाने वाला यह शख्स गांव फिरोजपुर कलां, बल्लभगढ़ में जन्मा और सरकारी स्कूलों में पला-बढ़ा। दसवीं के बाद पिता की इच्छा आईटीआई में एडमिशन दिलाने की थी, लेकिन नंबर कम आने पर खूब पिटाई हुई। पिता का दूध का काम था, घर-घर जाकर दूध बांटना पड़ता था। बल्लभगढ़ की चावला कॉलोनी में ट्यूशंस भी पढ़ाए हैं। पढ़ाई के प्रति जो ललक पैदा हुई वह अब तक बरकरार है। एम.कॉम, एमबीए, सीसीए, एलएलबी, पी.एचडी और डी.लिट कर चुके हैं। फाइनेंस के काम से शुरू हुआ कारोबार कई क्षेत्रों में फैल चुका है। रीयल एस्टेट के क्षेत्र में एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट साकार हो रहे हैं। रिटेल शॉप चेन वेल्यू बाजार की 46 यूनिट देशभर में काम कर रही हैं। उन्होंने 14 फूडकोर्ट व कई और तरह के नए कारोबार शुरू किए हैं। फिलहाल 2200 लोग इनके ग्रुप में काम कर रहे हैं और परोक्ष रूप से 5000 लोगों को काम मिल रहा है। इरादा दस हजार लोगों के लिए रोजगार सृजित करने का है। पलवल और फरीदाबाद में कई हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च हो चुके हैं। फाइव स्टार होटल भी पाइपलाइन में है। न पत्थर पहनने का शौक है और न ही सोना। दुनिया के कितने देशों की सैर की है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पासपोर्ट तीन बार भर चुका है। टेंशन में होते हैं तो भी काम ही करते हैं, बकौल डॉ. जिंदल काम की वजह से ही तो टेंशन होती है, वो बिना काम किए कैसे जा सकती है। आने वाले सालों के लिए ओल्ड एज होम, बिजली उत्पादन और कई अन्य प्रोजेक्ट्स पाइप लाइन में हैं। मीठे के शौकीन, खीर बेहद पसंद। जिंदगी में तरक्की के लिए ईमानदारी को मूल मंत्र मानते हैं।

सोमवार, 21 सितंबर 2009

02 डॉक्टरों की सियासत

डॉ अनिल गोयल, प्रेजिडेंट इंडियन मेडिकल असोसिएशन फरीदाबाद
डॉक्टर अनिल गोयल मूलत: मोंगा पंजाब के रहने वाले हैं, लेकिन पिताजी की नौकरी के दौरान दक्षिणी हरियाणा में लंबा वक्त गुजारा है। डॉक्टरों के परिवार (पिता, पत्नी, बहन, जीजा, भांजा- सभी डॉक्टर) से संबंध रखने वाले डॉक्टर गोयल ने डॉक्टरों के बीच की सियासत और उनकी समस्याओं को बेहतरीन तरीके से समझा है। पेडिएट्रिक्स में एम.डी. डॉक्टर गोयल सेंट स्टीफन्स हॉस्पिटल दिल्ली, जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल, बत्रा हॉस्पिटल दिल्ली और एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल फरीदाबाद आदि में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। डॉ. गोयल की एजुकेशन भटिंडा, चंडीगढ़ और लुधियाना की रही है और वे पिछले लगभग दो दशक से आईएमए में सक्रिय हैं। वह अपनी तरक्की का श्रेय पेरेंट्स और अपनी सक्रियता का श्रेय धर्मपत्नी को देते हैं। पेशे के साथ-साथ डॉ. गोयल ने सोसायटी के विभिन्न तबकों में रसूख पैदा किया है। उनका मानना है कि डॉक्टरों का संगठन मजबूत होना चाहिए क्योंकि डॉक्टर आज सोसायटी के सॉफ्ट टारगेट हैं और उनकी तादाद बेहद कम है। परिवार के इतने सारे लोगों के डॉक्टर होने पर जब उनसे पूछा गया कि क्या आपके बच्चे भी इसी प्रोफेशन में जाना चाहेंगे तो उनका कहना था कि नोबल प्रोफेशन है लेकिन यह बच्चों की खुद की इच्छा पर निर्भर करता है वे किस ओर जाना चाहेंगे। वैसे बच्चों का भी इरादा डॉक्टर बनने का ही है। डॉक्टर गोयल नीलम पहनते हैं और उनका फेवरेट कलर पिंक है।

01 Principal of Principle's



आनंद गुप्ता, प्रिन्सिपल विद्या मन्दिर स्कूल
आनंद गुप्ता शहर के सबसे बड़े मिडिल क्लास स्कूल के प्रिंसिपल हैं, जहां एकसाथ 4000 से ज्यादा स्टूडेंट पढ़ रहे हैं। मूल रूप से सोनीपत के रहने वाले श्री गुप्ता का लंबा वक्त मुजफ्फरनगर में गुजरा । पिता स्टेशन मास्टर थे, तो दूर तक जाती रेलगाडिय़ों और उन्हें अनंत तक ले जाती पटरियों से करीबी रिश्ता रहा है। एजुकेशन एम.एससी. फिजिक्स और फिर बी.एड.। उनका एकेडमिक कैरियर THROUGH आउट FIRST डिविजन वाला रहा है। रिसर्च की ओर जाने की इच्छा थी, लेकिन लिमिटेड सीटों के कारण संभव न हुआ। आज भी संभावनाओं वाले किसी स्टूडेंट को देखते हैं तो फ्लैश बैक में पहुंच जाते हैं। डीएवी कॉलेज मुज्जफरनगर में अपने फिजिक्स के लेक्चरर गोविंद राम की सादगी के आज भी मुरीद हैं। उस विद्वान व्यक्ति की सहजता और सरलता आज भी उन्हें प्रभावित करती है। 87 में फिजिक्स लेक्चरर के रूप में विद्या मंदिर जॉइन किया था तब से अब तक लगातार कामयाबी की सीढिय़ां चढ़ी हैं। साहित्य और क्रिकेट के फैन हैं। कॉलेज से शुरू हुआ बेडमिंटन खेलने का शौक अब भी शाम को उन्हें बैडमिंटन कोर्ट में खींच ले जाता है। उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में अक्सर लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। उनकी तमन्ना है कि एक ऐसा सिस्टम बने जिसमें बच्चा जो पढऩा चाहे उसे वह पढऩे को मिले बेशक उसके नंबर कम हों या ज्यादा।

थैंक्यू फरीदाबाद



साल भर पहले जब शहर के लिए इस कम्यूनिटी पेपर की शुरुआत कर रहे थे तो कई मित्रों ने इसे तीसरे-चौथे अंक के बाद बंद हो जाने वाला अखबार करार दिया था। लेकिन पिछले एक साल के दौरान आपका जो आशीर्वाद और सहयोग मिला वह वीओएफ टीम की आंखों में खुशी छलकाने के लिए काफी है। आप लोगों ने न सिर्फ इस अखबार को पसंद किया बल्कि अपना आशीर्वाद भी दिया। पिछले एक साल के दौरान बहुत सी चीजें शहर के पत्रकारिता इतिहास में पहली बार हुई। मसलन पहली बार कोई कम्यूनिटी पेपर ग्लेज्ड पेपर पर रंगीन छपना शुरू हुआ। इसके लेआउट, इसकी खबरें, खबरें परोसे जाने का सलीका पहली बार इतना सराहा गया। पहली बार स्थानीय नेताओं के काटूर्न की शुरुआत वीओएफ ने ही की। कई बार लगता है कि वीओएफ पत्रकारिता और कला के बीच की कुछ चीज निकल कर आई है। कलाएं राजाश्रय में पनपती हैं ऐसे में वीओएफ को उम्मीद है कि आप आगे भी ऐसा ही सहयोग और आशीर्वाद इसे देते रहेंगे। वीओएफ के एनवर्सरी इश्यू के रूप में हम शहर के ऐसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट लेकर आपके बीच आए हैं जो इस शहर को किसी भी हद तक प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। न तो इनमें सरकारी अफसर शामिल हैं और न ही राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग। लेकिन इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जिनका सिक्का वास्तव में इस शहर में चलता है। पिछले कुछ सालों में इस शहर के एजुकेशन सेक्टर में बूम आया है। निश्चित रूप से एजुकेशन सेक्टर से जुड़े लोग इस शहर में तेजी से बहुत शक्तिशाली होकर उभरे हैं। बहरहाल इश्यू आपके हाथ में है। पहले इश्यू में 50 पर्सनलिटीज को शुमार कर रहे हैं। कौन बड़ा है, कौन छोटा, हम इस पचड़े में नहीं पड़ रहे हैं अत: इनके नाम अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार रखने की कोशिश की है। इन लोगों में से अधिकांश पहली पीढ़ी के रईस हैं। मतलब यह कि उनकी खुद की मेहनत उन्हें इस मुकाम पर लेकर आई है। फरीदाबाद को उन्होंने अपने श्रम से गढ़ा है। अपने तेज से रोशन किया है। हालांकि कई बड़ी हस्तियां आपको इस अंक में दिखाई नहीं देंगी, क्योंकि हमने उन्हें चलता है जिनका सिक्का-2 में स्थान दिया है और वह अंक दीपावली के मौके पर प्रकाशित होगा। बताइएगा जरूर इश्यू कैसा लगा। आपकी प्रतिक्रियाओं के इंतजार में आपका

सौरभ भारद्वाज